यास-ओ-हिरास-ओ-जौर-ओ-जफ़ा से अलग-थलग

राही फ़िदाई

यास-ओ-हिरास-ओ-जौर-ओ-जफ़ा से अलग-थलग

राही फ़िदाई

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    यास-ओ-हिरास-ओ-जौर-ओ-जफ़ा से अलग-थलग

    इक साएबाँ है क़हर-ए-ख़ुदा से अलग-थलग

    देखो उठा है वो भी अलामत के तौर पर

    दस्त-ए-दराज़ दस्त-ए-दुआ से अलग-थलग

    परवाना-ए-हवा-ओ-हवस हाँ बराए-शौक़

    कोई मक़ाम शम-ए-वफ़ा से अलग-थलग

    कब तक रहेगा वहशी-ए-एहसास-ओ-आगही

    ना-साज़गार आब-ओ-हवा से अलग-थलग

    मिल जाएगा हिसार-ए-अज़ीमत के आस पास

    कर्ब-ए-सुकूत आह-ओ-बुका से अलग-थलग

    सद-हादसात-ए-ख़ाम हैं इबरत-निगाह में

    तारीख़-साज़ जुर्म-ओ-सज़ा से अलग-थलग

    इस ख़ौफ़ से सेहर-बयानी पे हर्फ़ आए

    'राही' रहे हैं चून-ओ-चरा से अलग-थलग

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