ईद शायरी

ईद एक त्यौहार है इस मौक़े पर लोग ख़ुशियाँ मनाते हैं लेकिन आशिक़ के लिए ख़ुशी का ये मौक़ा भी एक दूसरी ही सूरत में वारिद होता है। महबूब के हिज्र में उस के लिए ये ख़ुशी और ज़्यादा दुख भरी हो जाती है। कभी वो ईद का चाँद देख कर उस में महबूब के चेहरे की तलाश करता है और कभी सब को ख़ुश देख कर महबूब से फ़िराक़ की बद-नसीबी पर रोता है। ईद पर कही जाने वाली शायरी में और भी कई दिल-चस्प पहलू हैं। हमारा ये शेरी इन्तिख़ाब पढ़िए।

अपनी ख़ुशियाँ भूल जा सब का दर्द ख़रीद

'सैफ़ी' तब जा कर कहीं तेरी होगी ईद

सैफ़ी सिरोंजी

तुम बिन चाँद देख सका टूट गई उम्मीद

बिन दर्पन बिन नैन के कैसे मनाएँ ईद

बेकल उत्साही