ईद शायरी

ईद एक त्यौहार है इस मौक़े पर लोग ख़ुशियाँ मनाते हैं लेकिन आशिक़ के लिए ख़ुशी का ये मौक़ा भी एक दूसरी ही सूरत में वारिद होता है। महबूब के हिज्र में उस के लिए ये ख़ुशी और ज़्यादा दुख भरी हो जाती है। कभी वो ईद का चाँद देख कर उस में महबूब के चेहरे की तलाश करता है और कभी सब को ख़ुश देख कर महबूब से फ़िराक़ की बद-नसीबी पर रोता है। ईद पर कही जाने वाली शायरी में और भी कई दिल-चस्प पहलू हैं। हमारा ये शेरी इन्तिख़ाब पढ़िए।

जो लोग गुज़रते हैं मुसलसल रह-ए-दिल से

ओबैद आज़म आज़मी

मिल के होती थी कभी ईद भी दीवाली भी

अज्ञात

महक उठी है फ़ज़ा पैरहन की ख़ुशबू से

मोहम्मद असदुल्लाह

ईद ख़ुशियों का दिन सही लेकिन

फ़रहत एहसास

ऐ हवा तू ही उसे ईद-मुबारक कहियो

त्रिपुरारि

महक उठी है फ़ज़ा पैरहन की ख़ुशबू से

मोहम्मद असदुल्लाह