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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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A. D. Azhar's Photo'

ए. डी. अज़हर

1900 - 1974 | कराची, पाकिस्तान

उर्दू के प्रमुख शायर और सिविल सेवक

उर्दू के प्रमुख शायर और सिविल सेवक

ए. डी. अज़हर के शेर

तुझ से जुदा हुए तो तिरी याद बढ़ गई

आज़ाद हो के क़ैद की मीआ'द बढ़ गई

तू ख़्वाब ही में सही के ख़ुद जवाब तो दे

बुझी बुझी सी मिरी आरज़ू को आब तो दे

छेड़ शैख़ हम यूँही भले चल राह लग अपनी

तुझे तो बीवियाँ सूझी हैं हम बेज़ार बैठे हैं

था जिस पे नाज़ कभी अब वो आरज़ू रही

नियाज़-ए-'इश्क़ की पहली सी आबरू रही

वो बुलाते तो हैं मुझ को मगर जज़्बा-ए-दिल

शौक़ इतना भी बढ़ जाए कि जाए बने

वो कहते हैं कुछ देर है फ़ैसले में

कि 'उश्शाक़ की 'अर्ज़ियाँ और भी हैं

मिरी 'आशिक़ी सही बे-असर तिरी दिलबरी ने भी क्या किया

वही मैं रहा वही बे-दिली वही रंग-ए-लैल-ओ-नहार है

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