aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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आबिद उमर

ग़ज़ल 10

अशआर 2

ये क्या पड़ी है तुझे दिल जलों में बैठने की

ये उम्र तो है मियाँ दोस्तों में बैठने की

हूँ बा-वफ़ा तो मिरा सर नहीं झुकेगा कभी

जो बेवफ़ा हूँ तो फिर शर्म से गड़ा मिलूँगा

 

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