Abu Mohammad Wasil Bahraichi's Photo'

अबु मोहम्मद वासिल बहराईची

1922 - 2018 | बहराइच, भारत

ग़ज़ल 10

शेर 17

रह-ए-वफ़ा में उन्हीं की ख़ुशी की बात करो

वो ज़िंदगी हैं तो फिर ज़िंदगी की बात करो

हँसा करते हैं अक्सर लोग दीवानों की बातों पर

जहाँ वाले नहीं समझे मोहब्बत की ज़बाँ शायद

तिरे ख़याल में मैं हूँ मिरे ख़याल में तू

मिरे बग़ैर तिरी दास्ताँ रहे रहे

मिज़ाज-ए-हुस्न तो इक हाल पर रहा क़ाएम

लुटाने वालों ने सब कुछ लुटा के देख लिया

मुझे वो बातों बातों में अगर दीवाना कह देते

तो दीवानों में मेरी मो'तबर दीवानगी होती

"बहराइच" के और शायर

  • साग़र मेहदी साग़र मेहदी
  • अब्दुल रहमान ख़ान वस्फ़ी बहराईची अब्दुल रहमान ख़ान वस्फ़ी बहराईची
  • इज़हार वारसी इज़हार वारसी
  • इबरत बहराईची इबरत बहराईची
  • मोहम्मद फ़ैज़ुल्लाह फ़ैज़ मोहम्मद फ़ैज़ुल्लाह फ़ैज़
  • मोहम्मद नईमुल्लाह ख़्याली मोहम्मद नईमुल्लाह ख़्याली
  • अनंत शहरग अनंत शहरग
  • शौक़ बहराइची शौक़ बहराइची