noImage

अजीत सिंह हसरत

लुधियाना, भारत

ग़ज़ल 19

शेर 20

बस एक ही बला है मोहब्बत कहें जिसे

वो पानियों में आग लगाती है आज भी

पहले वक़्तों में हो तो हो शायद

दोस्ती अब हसीन गाली है

जिस में इंसानियत नहीं रहती

हम दरिंदे हैं ऐसे जंगल के

ई-पुस्तक 2

तंवीर-ए-फ़न

 

2006

तेरे नाम

 

2010

 

"लुधियाना" के और शायर

  • सरदार पंछी सरदार पंछी
  • विशाल खुल्लर विशाल खुल्लर
  • अज़ीज़ प्रीहार अज़ीज़ प्रीहार
  • वरुन आनन्द वरुन आनन्द
  • मुकेश आलम मुकेश आलम
  • फ़य्याज़ फ़ारुक़ी फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
  • अंजुम लुधियानवी अंजुम लुधियानवी