अनन्त फ़ानी के शेर
ठोकर ज़रा सी 'इश्क़ में क्या लग गई कि बस
बनने निकल पड़े हैं सभी 'जौन-एलिया'
यही बहुत थी ग़नीमत कि ठण्ड पड़ते ही
किसी को देख के आँखों ने हाथ सेंक लिए
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere