noImage

अनवर महमूद खालिद

गुजरात, पाकिस्तान

पाकिस्तानी शायर, उर्दू के अध्यापक रहे

पाकिस्तानी शायर, उर्दू के अध्यापक रहे

ग़ज़ल 4

 

शेर 4

जो हो सका मिरा उस को भूल जाऊँ मैं

पराई आग में क्यूँ उँगलियाँ जलाऊँ मैं

  • शेयर कीजिए

हुए असीर तो फिर उम्र भर रिहा हुए

हमारे गिर्द तअल्लुक़ का जाल ऐसा था

इक धमाके से फट जाए कहीं मेरा वजूद

अपना लावा आप बाहर फेंकता रहता हूँ मैं

इतना सन्नाटा है कुछ बोलते डर लगता है

साँस लेना भी दिल जाँ पे गिराँ है अब के

"गुजरात" के और शायर

  • अज़्मुल हसनैन अज़्मी अज़्मुल हसनैन अज़्मी
  • अतीक़ुर्रहमान सफ़ी अतीक़ुर्रहमान सफ़ी
  • एहसान घमन एहसान घमन
  • असमा तारिक़ असमा तारिक़