आरिफ़ इमाम

ग़ज़ल 11

अशआर 13

तलाश-ए-रिज़्क़ का ये मरहला अजब है कि हम

घरों से दूर भी घर के लिए बसे हुए हैं

  • शेयर कीजिए

तुम्हारे हिज्र में मरना था कौन सा मुश्किल

तुम्हारे हिज्र में ज़िंदा हैं ये कमाल किया

सुबू में अक्स-ए-रुख़-ए-माहताब देखते हैं

शराब पीते नहीं हम शराब देखते हैं

हवस जान तुझे छू के देखना ये है

तुझे ही देख रहे हैं कि ख़्वाब देखते हैं

इक बरस हो गया उसे देखे

इक सदी गई है साल के बीच

वीडियो 4

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

आरिफ़ इमाम

आरिफ़ इमाम

आरिफ़ इमाम

आरिफ़ इमाम

संबंधित शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI