Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Arman Ahmad's Photo'

अरमान अहमद

1998 | दिल्ली, भारत

अरमान अहमद के शेर

जानती पहचानती है दर हमारा

ढूँढ लेती है उदासी घर हमारा

आप को ख़ुद की नज़र लग जाएगी

आइने से फ़ासला रक्खा करो

दिल लेना है काम तुम्हारी आँखों का

कुछ रख दूँ मैं नाम तुम्हारी आँखों का

उड़ने वाले गिरे हैं ज़मीं पर सभी

देर तक आसमाँ में रहा कौन है

रात दिन बदले ग़म नहीं बदले

साल बदला है हम नहीं बदले

दोस्ती मज़बूत होती जाएगी

दोस्तों के काम आना चाहिए

Recitation

बोलिए