Asrarul Haq Majaz's Photo'

असरार-उल-हक़ मजाज़

1911 - 1955 | लखनऊ, भारत

अग्रणी एवं प्रख्यात प्रगतिशील शायर, रोमांटिक और क्रांतिकारी नज़्मों के लिए प्रसिद्ध, ऑल इंडिया रेडियो की पत्रिका “आवाज” के पहले संपादक, मशहूर शायर और गीतकार जावेद अख़्तर के मामा

अग्रणी एवं प्रख्यात प्रगतिशील शायर, रोमांटिक और क्रांतिकारी नज़्मों के लिए प्रसिद्ध, ऑल इंडिया रेडियो की पत्रिका “आवाज” के पहले संपादक, मशहूर शायर और गीतकार जावेद अख़्तर के मामा

ग़ज़ल

कुछ तुझ को ख़बर है हम क्या क्या ऐ शोरिश-ए-दौराँ भूल गए

असरार-उल-हक़ मजाज़

कुछ तुझ को ख़बर है हम क्या क्या ऐ शोरिश-ए-दौराँ भूल गए

असरार-उल-हक़ मजाज़

तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए

फ़हद हुसैन

ऐश से बे-नियाज़ हैं हम लोग

नोमान शौक़

कुछ तुझ को ख़बर है हम क्या क्या ऐ शोरिश-ए-दौराँ भूल गए

नोमान शौक़

कमाल-ए-इश्क़ है दीवाना हो गया हूँ मैं

नोमान शौक़

ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई

नोमान शौक़

जुनून-ए-शौक़ अब भी कम नहीं है

नोमान शौक़

तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए

नोमान शौक़

ये तीरगी-ए-शब ही कुछ सुब्ह-तराज़ आती

नोमान शौक़

ये मेरी दुनिया ये मेरी हस्ती

नोमान शौक़

यूँही बैठे रहो बस दर्द-ए-दिल से बे-ख़बर हो कर

नोमान शौक़

वो नक़ाब आप से उठ जाए तो कुछ दूर नहीं

नोमान शौक़

शौक़ के हाथों ऐ दिल-ए-मुज़्तर क्या होना है क्या होगा

नोमान शौक़

साक़ी-ए-गुलफ़ाम बा-सद एहतिमाम आ ही गया

नोमान शौक़

साज़गार है हमदम इन दिनों जहाँ अपना

नोमान शौक़

सारा आलम गोश-बर-आवाज़ है

नोमान शौक़

न हम-आहंग-ए-मसीहा न हरीफ़-ए-जिब्रील

ख़ालिद मुबश्शिर

नहीं ये फ़िक्र कोई रहबर-ए-कामिल नहीं मिलता

ख़ालिद मुबश्शिर

नज़्म

अँधेरी रात का मुसाफ़िर

नोमान शौक़

असरार-उल-हक़ मजाज़

नोमान शौक़

आवारा

फ़हद हुसैन

इशरत-ए-तन्हाई

नोमान शौक़

एक ग़मगीन याद

नोमान शौक़

उन का जश्न-ए-साल-गिरह

नोमान शौक़

ए'तिराफ़

नोमान शौक़

किस से मोहब्बत है

नोमान शौक़

ख़ाना-ब-दोश

नोमान शौक़

तआ'रुफ़

नोमान शौक़

नज़्र-ए-अलीगढ़

नोमान शौक़

नन्ही पुजारन

नोमान शौक़

रात और रेल

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI