ग़ज़ल 23

शेर 13

आज की रात दिवाली है दिए रौशन हैं

आज की रात ये लगता है मैं सो सकता हूँ

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वक़्त-ए-रुख़्सत आब-दीदा आप क्यूँ हैं

जिस्म से तो जाँ हमारी जा रही है

मैं ने इक शहर हमेशा के लिए छोड़ दिया

लेकिन उस शहर को आँखों में बसा लाया हूँ

आँसुओं से लिख रहे हैं बेबसी की दास्ताँ

लग रहा है दर्द की तस्वीर बन जाएँगे हम

यूँ बार बार मुझ को सदाएँ दीजिए

अब वो नहीं रहा हूँ कोई दूसरा हूँ मैं

पुस्तकें 3

Barf

 

2002

Mehrab-e-Ishq

 

 

सुरख़ाब

 

2008

 

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