Bashir Badr's Photo'

बशीर बद्र

1935 | भोपाल, भारत

सात संदूक़ों में भर कर दफ़्न कर दो नफ़रतें

उस की आँखों को ग़ौर से देखो

न तुम होश में हो न हम होश में हैं

हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं

सात संदूक़ों में भर कर दफ़्न कर दो नफ़रतें

तुम मोहब्बत को खेल कहते हो

गुफ़्तुगू उन से रोज़ होती है

जी बहुत चाहता है सच बोलें

तुम मोहब्बत को खेल कहते हो