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बशीर बद्र

1935 | भोपाल, भारत

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अज्ञात

Bashir Badr at International Mushaira 2002, Houston

Bashir Badr at International Mushaira 2002, Houston ज़फ़र इक़बाल

Bashir Badr reciting at Hind-o-Pak Dosti Aalmi Mushaira 2003, organized by Aligarh Alumni Association Houston, USA.

Bashir Badr reciting at Hind-o-Pak Dosti Aalmi Mushaira 2003, organized by Aligarh Alumni Association Houston, USA. ज़फ़र इक़बाल

Yeh Chirag Be Nazar Hai

Yeh Chirag Be Nazar Hai भारती विश्वनाथन

अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ

अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ फ़हद

हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाए

हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाए आर.जे सायमा

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो ज़फ़र इक़बाल

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो बशीर बद्र

अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा

अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा अज्ञात

अगर यक़ीं नहीं आता तो आज़माए मुझे

अगर यक़ीं नहीं आता तो आज़माए मुझे फ़हद

अगर यक़ीं नहीं आता तो आज़माए मुझे

अगर यक़ीं नहीं आता तो आज़माए मुझे हरिहरण

अगर यक़ीं नहीं आता तो आज़माए मुझे

अगर यक़ीं नहीं आता तो आज़माए मुझे हरिहरण

अब किसे चाहें किसे ढूँडा करें

अब किसे चाहें किसे ढूँडा करें शकीला ख़ुरासानी

अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ

अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ प्रित डिलन

अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ

अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ बशीर बद्र

आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा

आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा Urdu Studio

कभी यूँ भी आ मिरी आँख में कि मिरी नज़र को ख़बर न हो

कभी यूँ भी आ मिरी आँख में कि मिरी नज़र को ख़बर न हो जगजीत सिंह

कहाँ आँसुओं की ये सौग़ात होगी

कहाँ आँसुओं की ये सौग़ात होगी अज्ञात

कहीं चाँद राहों में खो गया कहीं चाँदनी भी भटक गई

कहीं चाँद राहों में खो गया कहीं चाँदनी भी भटक गई तलअत अज़ीज़

कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बँधा हुआ

कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बँधा हुआ आर.जे सायमा

कौन आया रास्ते आईना-ख़ाने हो गए

कौन आया रास्ते आईना-ख़ाने हो गए जगजीत सिंह

ख़ुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में

ख़ुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में चंदन दास

जब रात की तन्हाई दिल बन के धड़कती है

जब रात की तन्हाई दिल बन के धड़कती है हरिहरण

दुआ करो कि ये पौदा सदा हरा ही लगे

दुआ करो कि ये पौदा सदा हरा ही लगे चंदन दास

न जी भर के देखा न कुछ बात की

न जी भर के देखा न कुछ बात की नूर जहाँ

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे राज कुमार रिज़वी

भीगी हुई आँखों का ये मंज़र न मिलेगा

भीगी हुई आँखों का ये मंज़र न मिलेगा तलअत अज़ीज़

मैं कब तन्हा हुआ था याद होगा

मैं कब तन्हा हुआ था याद होगा चंदन दास

मुझ से बिछड़ के ख़ुश रहते हो

मुझ से बिछड़ के ख़ुश रहते हो जगजीत सिंह

मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे

मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे राजेन्द्र मेहता

मिरे दिल की राख कुरेद मत इसे मुस्कुरा के हवा न दे

मिरे दिल की राख कुरेद मत इसे मुस्कुरा के हवा न दे Urdu Studio

ये चराग़ बे-नज़र है ये सितारा बे-ज़बाँ है

ये चराग़ बे-नज़र है ये सितारा बे-ज़बाँ है चंदन दास

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो बशीर बद्र

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो विविध

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो Urdu Studio

रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना

रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना तलअत अज़ीज़

रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना

रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना तलअत अज़ीज़

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में ज़फ़र इक़बाल

वो अपने घर चला गया अफ़्सोस मत करो

वो अपने घर चला गया अफ़्सोस मत करो गुलबहार बानो

वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है

वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है चंदन दास

वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है

वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है बशीर बद्र

शबनम के आँसू फूल पर ये तो वही क़िस्सा हुआ

शबनम के आँसू फूल पर ये तो वही क़िस्सा हुआ तलअत अज़ीज़

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा जगजीत सिंह

सर-ए-राह कुछ भी कहा नहीं कभी उस के घर मैं गया नहीं

सर-ए-राह कुछ भी कहा नहीं कभी उस के घर मैं गया नहीं तलअत अज़ीज़

सर-ए-राह कुछ भी कहा नहीं कभी उस के घर मैं गया नहीं

सर-ए-राह कुछ भी कहा नहीं कभी उस के घर मैं गया नहीं बशीर बद्र

सोचा नहीं अच्छा बुरा देखा सुना कुछ भी नहीं

सोचा नहीं अच्छा बुरा देखा सुना कुछ भी नहीं चित्रा सिंह

है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है

है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है आर.जे सायमा

होंटों पे मोहब्बत के फ़साने नहीं आते

होंटों पे मोहब्बत के फ़साने नहीं आते मेहरान अमरोही

होंटों पे मोहब्बत के फ़साने नहीं आते

होंटों पे मोहब्बत के फ़साने नहीं आते भारती विश्वनाथन

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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