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बशीर बद्र

1935 | भोपाल, भारत

ग़ज़ल

अगर यक़ीं नहीं आता तो आज़माए मुझे

फ़हद हुसैन

अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ

फ़हद हुसैन

कभी यूँ भी आ मिरी आँख में कि मिरी नज़र को ख़बर न हो

फ़हद हुसैन

कहीं चाँद राहों में खो गया कहीं चाँदनी भी भटक गई

फ़हद हुसैन

कौन आया रास्ते आईना-ख़ाने हो गए

जगजीत सिंह

परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता

ज़फ़र इक़बाल

मेरी आँखों में तिरे प्यार का आँसू आए

फ़हद हुसैन

ये ज़र्द पत्तों की बारिश मिरा ज़वाल नहीं

ज़फ़र इक़बाल

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

ज़फ़र इक़बाल

है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है

ज़फ़र इक़बाल

अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ

नोमान शौक़

आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा

नोमान शौक़

कहीं चाँद राहों में खो गया कहीं चाँदनी भी भटक गई

नोमान शौक़

किसी की याद में पलकें ज़रा भिगो लेते

नोमान शौक़

ख़ुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में

नोमान शौक़

जब तक निगार-ए-दाश्त का सीना दुखा न था

नोमान शौक़

दुआ करो कि ये पौदा सदा हरा ही लगे

नोमान शौक़

हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाए

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI