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बशीरुद्दीन अहमद देहलवी

प्रतिष्ठित साहित्यिकार, शायर, दकन और दिल्ली के इतिहास पर अपनी यादगार किताबों के लिए प्रसिद्ध

प्रतिष्ठित साहित्यिकार, शायर, दकन और दिल्ली के इतिहास पर अपनी यादगार किताबों के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल 8

शेर 12

बंधन सा इक बँधा था रग-ओ-पय से जिस्म में

मरने के ब'अद हाथ से मोती बिखर गए

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चराग़ उस ने बुझा भी दिया जला भी दिया

ये मेरी क़ब्र पे मंज़र नया दिखा भी दिया

कभी दर पर कभी है रस्ते में

नहीं थकती है इंतिज़ार से आँख

ई-पुस्तक 20

Deewan-e-Basheer

 

1924

Deewan-e-Basheer

 

1924

Hikayat-e-Lateefa

Part-001

1925

Hikayat-e-Lateefa

Part-002

1925

हिकायात-ए-लतीफ़ा

भाग-003

 

हिर्ज़-ए-तिफ़लान

 

1914

Husn-e-Muasharat

 

1926

Iqbal Dulhan

 

1908

islaah-e-Maishat

 

1914

लख़्त-ए-जिगर

भाग-001

1921