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नौजवान पाकिस्तानी शायरों में अहम

नौजवान पाकिस्तानी शायरों में अहम

दिलावर अली आज़र

ग़ज़ल 26

अशआर 12

उस से मिलना तो उसे ईद-मुबारक कहना

ये भी कहना कि मिरी ईद मुबारक कर दे

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उस से कुछ ख़ास तअल्लुक़ भी नहीं है अपना

मैं परेशान हुआ जिस की परेशानी पर

मैं जब मैदान ख़ाली कर के आया

मिरा दुश्मन अकेला रह गया था

अब मुझ को एहतिमाम से कीजे सुपुर्द-ए-ख़ाक

उक्ता चुका हूँ जिस्म का मलबा उठा के मैं

चाँद तारे तो मिरे बस में नहीं हैं 'आज़र'

फूल लाया हूँ मिरा हाथ कहाँ तक जाता

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