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दिलकश सागरी

भोपाल, भारत

ग़ज़ल 3

 

शेर 1

इंक़लाब-ए-नौ के उजाले कहाँ है तू

सड़कों पे मेरे शहर की कब तक धुआँ रहे

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ई-पुस्तक 2

Bhopal Mein Ghazal

 

 

Kharam-e-Harf

 

1991

 

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