Kaif Bhopali's Photo'

कैफ़ भोपाली

1917 - 1991 | भोपाल, भारत

प्रसिद्ध शायर एवं गीतकार जो फिल्म "पाकीज़ा" में अपने गीत के लिए मशहूर हुए।

प्रसिद्ध शायर एवं गीतकार जो फिल्म "पाकीज़ा" में अपने गीत के लिए मशहूर हुए।

ग़ज़ल 29

शेर 36

ज़िंदगी शायद इसी का नाम है

दूरियाँ मजबूरियाँ तन्हाइयाँ

दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले

हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले

आग का क्या है पल दो पल में लगती है

बुझते बुझते एक ज़माना लगता है

तुझे कौन जानता था मिरी दोस्ती से पहले

तिरा हुस्न कुछ नहीं था मिरी शाइरी से पहले

कौन आएगा यहाँ कोई आया होगा

मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा

पुस्तकें 3

Aahang-e-Kaif

 

1993

Chand Ke Paar

 

2002

Ku-e-Butan

 

1963

 

चित्र शायरी 12

हम ने आदाब-ए-ग़म का पास किया नक़्द-ए-जाँ को ज़ियाँ क़यास क्या ज़ीस्त के तजरबात का हम ने मिस्ल-ए-आईना इनइ'कास किया ख़बर-ए-आगही के पर्दे में उम्र भर मातम-ए-हवास किया तोहमत-ए-शो'ला-ज़बाँ ले कर सूरत-ए-ज़ख़्म इल्तिमास किया कैसे इक लफ़्ज़ में बयाँ कर दूँ दिल को किस बात ने उदास किया आ गया जब सलीक़ा-ए-ता'मीर क़स्र-ए-हस्ती को बे-असास क्या क्यूँ 'सहर' तुम ने अपने सहरा को मौज-ए-दरिया से रू-शनास किया

वीडियो 5

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अज्ञात

हाए लोगों की करम-फ़रमाइयाँ

मेहरान अमरोही

ऑडियो 7

कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा

जब हमें मस्जिद जाना पड़ा है

तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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