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अब्दुल मतीन नियाज़

1929 | भोपाल, भारत

60 के दशक में उभरने वाले अहम शायरों में शामिल, गहरी समझ और घोर भावनात्मक रवय्ये की शायरी करने के लिए प्रसिद्ध

60 के दशक में उभरने वाले अहम शायरों में शामिल, गहरी समझ और घोर भावनात्मक रवय्ये की शायरी करने के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल 8

शेर 10

वक़्त मोहलत देगा फिर तुम को

तीर जिस दम कमान से निकला

दिल ने हर दौर में दुनिया से बग़ावत की है

दिल से तुम रस्म-ओ-रिवायात की बातें करो

हम-नफ़स ख़्वाब-ए-जुनूँ की कोई ता'बीर देख

रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर देख

अल्फ़ाज़ मदह-ख़्वाँ थे क़लम थे बिके हुए

कैसे तराश लेते कोई शाह-कार हम

कितने बे-नूर हैं ये हंगामे

मैं भरे शहर में भी हूँ तन्हा

पुस्तकें 7

अज़ान-ए-शेर

 

1998

Dasht-e-Maani

 

1985

Dasht-e-Maani

 

1987

Harf-o-Sada

 

1975

Harf-o-Sada

 

 

नग़्मा-ए-शुऊर

 

1967

Titliyon Ke Geet

 

1988

 

"भोपाल" के और शायर

  • बशीर बद्र बशीर बद्र
  • अख़्तर सईद ख़ान अख़्तर सईद ख़ान
  • कैफ़ भोपाली कैफ़ भोपाली
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  • ज़िया फ़ारूक़ी ज़िया फ़ारूक़ी
  • अहमद कमाल परवाज़ी अहमद कमाल परवाज़ी
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  • मंज़र भोपाली मंज़र भोपाली