ग़ज़ल 28

नज़्म 1

 

शेर 16

हम तो तमाम उम्र तिरी ही अदा रहे

ये क्या हुआ कि फिर भी हमीं बेवफ़ा रहे

हम से कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर तो है उसे

वो यार बा-वफ़ा सही बेवफ़ा तो है

दिल की क़ीमत तो मोहब्बत के सिवा कुछ भी थी

जो मिले सूरत-ए-ज़ेबा के ख़रीदार मिले

पुस्तकें 1

Pas-e-Aaina

 

1984

 

"रावलपिंडी" के और शायर

  • अख़्तर होशियारपुरी अख़्तर होशियारपुरी
  • साबिर ज़फ़र साबिर ज़फ़र
  • बाक़ी सिद्दीक़ी बाक़ी सिद्दीक़ी
  • हसन अब्बास रज़ा हसन अब्बास रज़ा
  • जलील ’आली’ जलील ’आली’
  • मंज़ूर आरिफ़ मंज़ूर आरिफ़
  • अफ़ज़ल मिनहास अफ़ज़ल मिनहास
  • नवेद फ़िदा सत्ती नवेद फ़िदा सत्ती
  • यूसुफ़ ज़फ़र यूसुफ़ ज़फ़र
  • नसीर अहमद नासिर नसीर अहमद नासिर