Ehtisham ul Haq Siddiqui's Photo'

एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी

मुजफ्फरनगर, भारत

तू मर्द-ए-मोमिन है अपनी मंज़िल को आसमानों पे देख नादाँ

कि राह-ए-ज़ुल्मत में साथ देगा कोई चराग़-ए-अलील कब तक

ये दुनिया है यहाँ असली कहानी पुश्त पर रखना

लबों पर प्यास रखना और पानी पुश्त पर रखना

मैं इक मज़दूर हूँ रोटी की ख़ातिर बोझ उठाता हूँ

मिरी क़िस्मत है बार-ए-हुक्मरानी पुश्त पर रखना

शुऊर-ए-नौ-उम्र हूँ मुझ को मता-ए-रंज-ओ-मलाल देना

कि मुझ को आता नहीं ग़मों को ख़ुशी के साँचों मैं ढाल देना

तिरे बदन की नज़ाकतों का हुआ है जब हम-रिकाब मौसम

नज़र नज़र में खिला गया है शरारतों के गुलाब मौसम