यूफ़ोनिक अमित के शेर
फूल खिलते हैं तो लगता है तिरे होंटों ने
मुस्कुराहट को बड़े नाज़ से आज़ाद किया
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आप ने जिस को फ़रिश्ते का दिया था दर्जा
उस की इंसानों सी फ़ितरत है तो हैरत क्या है
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एहसान ले के दिल से करें शुक्रिया अदा
दुनिया में कम हैं जिन में ये ग़ैरत है आज-कल
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जो औरों को उड़ते हुए देखता हो
वो पिंजरे में कैसे सुकूँ से रहेगा
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मिरे क़लम की सियाही में 'इश्क़ है तेरा
मिरा ये नाम ये शोहरत तिरी बदौलत है
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हिज्र में शिद्दत दिखाते हैं सभी 'आशिक़ मगर
लुत्फ़ तब है वस्ल हो पर आरज़ू बाक़ी रहे
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जो हक़ीक़त से ख़ौफ़ खाने लगे
ख़्वाब ऐसे मैं देखता ही नहीं
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नाचे है मोहब्बत की ये सुर ताल पे ख़ुद ही
दिल को ये हुनर यार सिखाया नहीं जाता
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'अजब एहसास है कि जब उसे देखूँ
मुझे पहली मोहब्बत याद आती है
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उमीदों से करो आज़ाद और फिर
मोहब्बत की सनम परवाज़ देखो
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