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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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Euphonic Amit's Photo'

यूफ़ोनिक अमित

1984 | दिल्ली, भारत

यूफ़ोनिक अमित के शेर

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फूल खिलते हैं तो लगता है तिरे होंटों ने

मुस्कुराहट को बड़े नाज़ से आज़ाद किया

आप ने जिस को फ़रिश्ते का दिया था दर्जा

उस की इंसानों सी फ़ितरत है तो हैरत क्या है

एहसान ले के दिल से करें शुक्रिया अदा

दुनिया में कम हैं जिन में ये ग़ैरत है आज-कल

जो औरों को उड़ते हुए देखता हो

वो पिंजरे में कैसे सुकूँ से रहेगा

मिरे क़लम की सियाही में 'इश्क़ है तेरा

मिरा ये नाम ये शोहरत तिरी बदौलत है

हिज्र में शिद्दत दिखाते हैं सभी 'आशिक़ मगर

लुत्फ़ तब है वस्ल हो पर आरज़ू बाक़ी रहे

जो हक़ीक़त से ख़ौफ़ खाने लगे

ख़्वाब ऐसे मैं देखता ही नहीं

नाचे है मोहब्बत की ये सुर ताल पे ख़ुद ही

दिल को ये हुनर यार सिखाया नहीं जाता

'अजब एहसास है कि जब उसे देखूँ

मुझे पहली मोहब्बत याद आती है

उमीदों से करो आज़ाद और फिर

मोहब्बत की सनम परवाज़ देखो

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