फ़हीमा ख़ालिद का परिचय
पहचान:फ़हीमा मिर्ज़ा कि रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं, विस्थापन, जीवनानुभवों और सामाजिक अवलोकनों की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है।
फ़हीमा ख़ालिद साहित्यिक जगत में फ़हीमा मिर्ज़ा के नाम से लिखती हैं। उनका जन्म 6 नवंबर 1957 को हुआ। बचपन से ही साहित्य के प्रति गहरी रुचि थी। विद्यालय के दिनों में कविताएँ लिखने और विभिन्न कार्यक्रमों में उन्हें प्रस्तुत करने के अवसर मिले, जिससे उनकी रचनात्मक प्रतिभा को निरंतर प्रोत्साहन मिला। घर का साहित्यिक वातावरण भी उनके साहित्यिक व्यक्तित्व के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उनके मामा अज़ीम मुआविया प्रसिद्ध विद्वान, शिक्षक और साहित्यिक चिंतक थे। उनके कारण घर में अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक व्यक्तित्वों का आना-जाना रहता था और साहित्यिक गतिविधियों से उनका निकट परिचय हुआ।
फ़हीमा मिर्ज़ा के जीवन और शिक्षा का एक बड़ा हिस्सा कुवैत में बीता। वहाँ शैक्षिक संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बावजूद उन्होंने बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त की। कुवैत में रहते हुए भी उनकी साहित्यिक और काव्य-गतिविधियाँ जारी रहीं तथा वे काव्य-गोष्ठियों में भाग लेती रहीं। 1990 में कुवैत-इराक युद्ध के दौरान उन्हें अचानक कुवैत छोड़ना पड़ा। इस आकस्मिक प्रवासन में उनकी जीवन भर की अधिकांश लिखी-पढ़ी सामग्री और साहित्यिक धरोहर वहीं छूट गई। पाकिस्तान लौटने के बाद जीवन और साहित्यिक यात्रा को नए सिरे से व्यवस्थित करने में उन्हें कई वर्ष लगे।
2023 में उनका पहला काव्य-संग्रह ‘इंसान बेफ़रोख़्त’ प्रकाशित हुआ। इसके बाद 2026 की शुरुआत में उनका उपन्यास ‘शब-गज़ीदा आँखें’ प्रकाशित हुआ। उनका यात्रा-वृत्तांत ‘ज़ाख़ो का आसमान’ भी शीघ्र प्रकाशित होने वाला है, जिसमें कुवैत से ज़मीनी मार्ग द्वारा निकलने के बाद इराक, तुर्की और ईरान में हुए उनके अनुभवों, यात्राओं और अवलोकनों को दर्ज किया गया है।
साहित्य के साथ-साथ फ़हीमा मिर्ज़ा ने लंदन से फ़ैशन डिज़ाइनिंग और ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा लंबे समय तक इसे पेशे के रूप में अपनाया। लेकिन साहित्य के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता के कारण अंततः उन्होंने अपना पूरा ध्यान लेखन और साहित्यिक सृजन पर केंद्रित कर दिया।