पुस्तकें 4

Mazi Tajziyati Mutala

 

2007

Saghar Nizami Hayat Aur Karname

 

2007

Saghar Nizami-Hayat Aur Karname

 

2007

Saz-o-Awaz

 

1983

 

वीडियो 7

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
इस ज़मीं आसमाँ के थे ही नहीं

फ़ारूक़ बख़्शी

कभी आओ

मिरे बालों में चाँदी खिल रही है फ़ारूक़ बख़्शी

ये सौदा इश्क़ का आसान सा हे

फ़ारूक़ बख़्शी

रेज़ा रेज़ा सा भला मुझ में बिखरता क्या हे

फ़ारूक़ बख़्शी

वो चाँद-चेहरा सी एक लड़की

वो चाँद-चेहरा सी एक लड़की फ़ारूक़ बख़्शी

वो बस्ती याद आती है

वो बस्ती याद आती है फ़ारूक़ बख़्शी

वो बस्ती याद आती है

वो बस्ती याद आती है फ़ारूक़ बख़्शी

ऑडियो 6

इस ज़मीं आसमाँ के थे ही नहीं

इस ज़मीं आसमाँ के थे ही नहीं

ये सौदा इश्क़ का आसान सा हे

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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