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फ़ारूक़ बख़्शी

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वीडियो 7

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
इस ज़मीं आसमाँ के थे ही नहीं

फ़ारूक़ बख़्शी

कभी आओ

मिरे बालों में चाँदी खिल रही है फ़ारूक़ बख़्शी

ये सौदा इश्क़ का आसान सा हे

फ़ारूक़ बख़्शी

रेज़ा रेज़ा सा भला मुझ में बिखरता क्या हे

फ़ारूक़ बख़्शी

वो चाँद-चेहरा सी एक लड़की

वो चाँद-चेहरा सी एक लड़की फ़ारूक़ बख़्शी

वो बस्ती याद आती है

वो बस्ती याद आती है फ़ारूक़ बख़्शी

वो बस्ती याद आती है

वो बस्ती याद आती है फ़ारूक़ बख़्शी

ऑडियो 5

इस ज़मीं आसमाँ के थे ही नहीं

ये सौदा इश्क़ का आसान सा हे

रेज़ा रेज़ा सा भला मुझ में बिखरता क्या हे

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