इशरत आफ़रीं

ग़ज़ल 38

शेर 13

भूक से या वबा से मरना है

फ़ैसला आदमी को करना है

अकेले घर में भरी दोपहर का सन्नाटा

वही सुकून वही उम्र भर का सन्नाटा

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शाम को तेरा हँस कर मिलना

दिन भर की उजरत होती है

लड़कियाँ माओं जैसे मुक़द्दर क्यूँ रखती हैं

तन सहरा और आँख समुंदर क्यूँ रखती हैं

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तेरा नाम लिखती हैं उँगलियाँ ख़लाओं में

ये भी इक दुआ होगी वस्ल की दुआओं में

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पुस्तकें 1

Kunj Peele Phoolon Ka

 

1986

 

वीडियो 6

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

इशरत आफ़रीं

इशरत आफ़रीं

इशरत आफ़रीं

Ishrat Afreen in Jashn e Nida Fazli 2010

इशरत आफ़रीं

ख़ुश्बू संदल और न गहना दुख देगा

इशरत आफ़रीं

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