अमीन तिरमिज़ी

अशआर 8

तुम से कहा था बाम पे मत जाना आज शाम

देखा नाँ सारे शहर की तो ईद हो गई

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तमाम शहर गले लग गया तो क्या हासिल

वो हम को मुँह जो लगाए तो ईद हो जाए

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मैं जब जब भी किसी काग़ज़ पे तेरा नाम लिखता हूँ

चमक तहरीर से और महक काग़ज़ से आती है

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क्या कहूँ क्या सुरूर पाया है

जब से वो हाथ हाथ आया है

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मैं ये आँखें भी तिरी नज़्र तो कर दूँ लेकिन

तेरी तस्वीर इन्हें देखती रहती है बहुत

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"टेक्सास" के और शायर

 

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI