ग़ज़ल 20

शेर 26

दे हौसले की दाद के हम तेरे ग़म में आज

बैठे हैं महफ़िलों को सजाए तिरे बग़ैर

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मैं इस से क़ीमती शय कोई खो नहीं सकता

'अदील' माँ की जगह कोई हो नहीं सकता

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तुझ से जुदा हुए तो ये हो जाएँगे जुदा

बाक़ी कहाँ रहेंगे ये साए तिरे बग़ैर

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दे हौसले की दाद कि हम तेरे ग़म में आज

बैठे हैं महफ़िलों को सजाए तिरे बग़ैर

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जब अपनी सर-ज़मीन ने मुझ को दी पनाह

अंजान वादियों में उतरना पड़ा मुझे

क़ितआ 1

 

पुस्तकें 5

Azan-e-Majlis

 

2008

Bayaz-e-Akhtar

 

2009

Chalte Chalte

 

2001

Kahan Aa Gaye Ham

 

2009

शायर

Shumara Number-011

2009

 

चित्र शायरी 1

दे हौसले की दाद के हम तेरे ग़म में आज बैठे हैं महफ़िलों को सजाए तिरे बग़ैर

 

वीडियो 6

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
क़र्ज़-ए-जाँ से निमट रही है हयात

अदील ज़ैदी

दुकान-दार

ये ताजिरान-ए-दीन हैं अदील ज़ैदी

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