Farooq Shamim's Photo'

फ़ारूक़ शमीम

1953 - | औरंगाबाद, भारत

ग़ज़ल 6

शेर 6

धूप छूती है बदन को जब 'शमीम'

बर्फ़ के सूरज पिघल जाते हैं क्यूँ

हिसार-ए-ज़ात से कट कर तो जी नहीं सकते

भँवर की ज़द से यूँ महफ़ूज़ अपनी नाव रख

अपने ही फ़न की आग में जलते रहे 'शमीम'

होंटों पे सब के हौसला-अफ़ज़ाई रह गई

ई-पुस्तक 1

Pesh Rao : Ghazlein

 

2000

 

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