George Puech Shor's Photo'

जोर्ज पेश शोर

1823 - 1894 | मेरठ, भारत

ग़ज़ल 3

 

शेर 20

गुज़िश्ता साल जो देखा वो अब की साल नहीं

ज़माना एक सा बस हर बरस नहीं चलता

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इसी ख़याल में दिन-रात मैं तड़पता हूँ

तुम्हीं क़रार भी दोगे जो बे-क़रार किया

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इक नज़र ने किया है काम तमाम

आरज़ू भी तो थी यही दिल की

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रुबाई 8

पुस्तकें 2

Atthara Sau Sattawan Ke Inqilab Ka Aini Shahid: George Puech Shor

 

2011

Deewan-e-Shor

 

1877

 

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