Ghulam Mohammad Qasir's Photo'

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

1941 - 1999 | पेशावर, पाकिस्तान

पाकिस्तान के लोकप्रिय और प्रतिष्ठित शयार

पाकिस्तान के लोकप्रिय और प्रतिष्ठित शयार

ग़ज़ल

आफ़ाक़ में फैले हुए मंज़र से निकल कर

नोमान शौक़

किताब-ए-आरज़ू के गुम-शुदा कुछ बाब रक्खे हैं

नोमान शौक़

ख़ामोश थे तुम और बोलता था बस एक सितारा आँखों में

नोमान शौक़

गलियों की उदासी पूछती है घर का सन्नाटा कहता है

नोमान शौक़

फिर वही कहने लगे तू मिरे घर आया था

नोमान शौक़

बन से फ़सील-ए-शहर तक कोई सवार भी नहीं

नोमान शौक़

बयाबाँ दूर तक मैं ने सजाया था

नोमान शौक़

बारूद के बदले हाथों में आ जाए किताब तो अच्छा हो

नोमान शौक़

मिलने की हर आस के पीछे अन-देखी मजबूरी थी

नोमान शौक़

ये जहाँ-नवर्द की दास्ताँ ये फ़साना डोलते साए का

नोमान शौक़

वादे यख़-बस्ता कमरों के अंदर गिरते हैं

नोमान शौक़

वो बे-दिली में कभी हाथ छोड़ देते हैं

नोमान शौक़

सब रंग ना-तमाम हों हल्का लिबास हो

नोमान शौक़

सोए हुए जज़्बों को जगाना ही नहीं था

नोमान शौक़

नज़्म

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI