Habeeb Ahmad Siddiqui's Photo'

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

1908

ग़ज़ल 12

शेर 35

मुझ को एहसास-ए-रंग-ओ-बू हुआ

यूँ भी अक्सर बहार आई है

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वो भला कैसे बताए कि ग़म-ए-हिज्र है क्या

जिस को आग़ोश-ए-मोहब्बत कभी हासिल हुआ

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आप शर्मिंदा जफ़ाओं पे हों

जिन पे गुज़री थी वही भूल गए

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पुस्तकें 8

Diwan-e-Habib

 

1948

Gul-e-Sadbarg

 

1976

इंतिख़ाब-ए-कलाम हबीब अहमद सिद्दीक़ी

 

1959

जल्वा-ए-सब रंग

 

1948

नक़ीब-ए-बहार

 

1990

Publicity Mushaira Gorakhpur

 

1999

पब्लिसटी मुशायरा गोरख पुर

 

 

Sheesha-o-Sang

 

1966