ग़ज़ल 6

शेर 2

ये दिल है मिरा या किसी कुटिया का दिया है

बुझता है दम-ए-सुब्ह तो जलता है सर-ए-शाम

सिमटा तिरा ख़याल तो गुल-रंग अश्क था

फैला तो मिस्ल-ए-दश्त-ए-वफ़ा फैलता गया

 

पुस्तकें 2

Kulliyat-e-Hafeez Taib

 

2005

Sallu Alaihi Wa Aalihi

 

1978

 

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