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हामिद मुख़्तार हामिद

मुजफ्फरनगर, भारत

हामिद मुख़्तार हामिद

ग़ज़ल 7

शेर 8

ये जफ़ाओं की सज़ा है कि तमाशाई है तू

ये वफ़ाओं की सज़ा है कि पए-दार हूँ मैं

आज का ख़त ही उसे भेजा है कोरा लेकिन

आज का ख़त ही अधूरा नहीं लिख्खा मैं ने

उम्र ही तेरी गुज़र जाएगी उन के हल में

तेरा बच्चा जो सवालात लिए बैठा है

गिर जाए तिरे मेयार से अंदाज़-ए-हुरूफ़

यूँ कभी नाम भी तेरा नहीं लिख्खा मैं ने

ये बुज़ुर्गों की रवा-दारी के पज़-मुर्दा गुलाब

आबियारी चाहते हैं इन में चिंगारी रख

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