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हनीफ़ अख़गर

1928 - 2009 | संयुक्त राज्य अमेरिका

ग़ज़ल 23

शेर 32

शामिल हुए हैं बज़्म में मिस्ल-ए-चराग़ हम

अब सुब्ह तक जलेंगे लगातार देखना

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इश्क़ में दिल का ये मंज़र देखा

आग में जैसे समुंदर देखा

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इज़हार पे भारी है ख़मोशी का तकल्लुम

हर्फ़ों की ज़बाँ और है आँखों की ज़बाँ और

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वीडियो 13

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

हनीफ़ अख़गर

हनीफ़ अख़गर

हनीफ़ अख़गर

हनीफ़ अख़गर

हनीफ़ अख़गर

हनीफ़ अख़गर

हनीफ़ अख़गर

हनीफ़ अख़गर

अज़्म-ए-सफ़र से पहले भी और ख़त्म-ए-सफ़र से आगे भी

हनीफ़ अख़गर

इस तरह अहद-ए-तमन्ना को गुज़ारे जाइए

हनीफ़ अख़गर

ख़ल्वत-ए-जाँ में तिरा दर्द बसाना चाहे

हनीफ़ अख़गर

ख़ल्वत-ए-जाँ में तिरा दर्द बसाना चाहे

हनीफ़ अख़गर

वो दिल में और क़रीब-ए-रग-ए-गुलू भी मिले

हनीफ़ अख़गर

हनीफ़ अख़गर

हनीफ़ अख़गर

हाल-ए-दिल-ए-बीमार समझ में चारागरों की आए कम

हनीफ़ अख़गर