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हसन रिज़वी

1946 - 2002

ग़ज़ल 25

शेर 5

वो इक़रार करता है वो इंकार करता है

हमें फिर भी गुमाँ है वो हमीं से प्यार करता है

कभी किताबों में फूल रखना कभी दरख़्तों पे नाम लिखना

हमें भी है याद आज तक वो नज़र से हर्फ़-ए-सलाम लिखना

था जो एक लम्हा विसाल का वो रियाज़ था कई साल का

वही एक पल में गुज़र गया जिसे उम्र गुज़री पुकारते

पुस्तकें 6

Dekha Hindustan

 

1987

Dekha Hindustan

 

1992

Guft-o-Shaneed

 

1990

हिज्र दी पहली शाम

 

1986

Woh Tera Shair Woh Tera Nasir

Nasir Kazmi Shakhsiyat Aur Fan

1996

 

वीडियो 3

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