Ijtiba Rizvi's Photo'

इज्तिबा रिज़वी

1908 - 1991 | छपरा, भारत

ग़ज़ल 5

 

नज़्म 2

 

शेर 5

अफ़्सुर्दगी भी हुस्न है ताबिंदगी भी हुस्न

हम को ख़िज़ाँ ने तुम को सँवारा बहार ने

ख़िरद को ख़ाना-ए-दिल का निगह-बाँ कर दिया हम ने

ये घर आबाद होता इस को वीराँ कर दिया हम ने

मिरे साज़-ए-नफ़स की ख़ामुशी पर रूह कहती है

आई मुझ को नींद और सो गया अफ़्साना-ख़्वाँ मेरा

पुस्तकें 1

Shola-e-Nida

 

1954

 

ऑडियो 5

इक अख़्गर-ए-जमाल फ़रोज़ाँ ब-शक्ल-ए-दिल

ख़िरद को ख़ाना-ए-दिल का निगह-बाँ कर दिया हम ने

चुराने को चुरा लाया मैं जल्वे रू-ए-रौशन से

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

संबंधित शायर

  • परवेज़ शाहिदी परवेज़ शाहिदी समकालीन
  • जमील मज़हरी जमील मज़हरी समकालीन
  • अब्बास अली ख़ान बेखुद अब्बास अली ख़ान बेखुद समकालीन

"छपरा" के और शायर

  • हैदर रज़ा कोरालवी हैदर रज़ा कोरालवी