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जमील मज़हरी

1904 - 1979 | कोलकाता, भारत

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर, अपने अपारम्परिक विचारों के लिए विख्यात

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर, अपने अपारम्परिक विचारों के लिए विख्यात

ग़ज़ल

उलझी थी ज़ुल्फ़ उस ने सँवारा सँवर गई

नोमान शौक़

कब तक निबाहें ऐसे ग़लत आदमी से हम

नोमान शौक़

कहो न ये कि मोहब्बत है तीरगी से मुझे

नोमान शौक़

किसी का ख़ून सही इक निखार दे तो दिया

नोमान शौक़

ग़ौर तो कीजे कि ये सज्दा-रवा क्यूँ कर हुआ

नोमान शौक़

जिस सम्त नज़र जाए मेला नज़र आता है

नोमान शौक़

तिरा हुस्न भी बहाना मिरा इश्क़ भी बहाना

नोमान शौक़

बदल जाते हैं दिल हालात जब करवट बदलते हैं

नोमान शौक़

मैं सदक़े तुझ पे अदा तेरे मुस्कुराने की

नोमान शौक़

सुब्ह ख़ुद बताएगी तीरगी कहाँ जाए

नोमान शौक़

हस्ती है जुदाई से उस की जब वस्ल हुआ तो कुछ भी नहीं

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI