Kaif Azimabadi's Photo'

कैफ़ अज़ीमाबादी

1937

दीवार-ओ-दर पे ख़ून के छींटे हैं जा-ब-जा

बिखरा हुआ है रंग-ए-हिना तेरे शहर में

तुम समुंदर की रिफ़ाक़त पे भरोसा करो

तिश्नगी लब पे सजाए हुए मर जाओगे

निकल आए तन्हा तिरी रह-गुज़र पर

भटकने को हम कारवाँ छोड़ आए

ख़ुशबू-ए-हिना कहना नर्मी-ए-सबा कहना

जो ज़ख़्म मिले तुम को फूलों की क़बा कहना