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ख़ालिद कर्रार

1976 | जम्मू, भारत

नई नस्ल के महत्वपूर्ण शायर।

नई नस्ल के महत्वपूर्ण शायर।

ख़ालिद कर्रार

ग़ज़ल 11

नज़्म 8

अशआर 5

बात ये है कि सभी भाई मिरे दुश्मन हैं

मसअला ये है कि मैं यूसुफ़-ए-सानी भी नहीं

फिर इस के बाद मिरी रात बे-मिसाल हुई

उधर वो शोला-बदन था इधर मैं पानी था

कोई तो आए सुनाए नवेद-ए-ताज़ा मुझे

उठो कि हश्र से पहले हिसाब होने लगा

कलीसा मौलवी राहिब पुजारी

कलस मीनार बुत मेहराब सहरा

सच तो ये है कि मिरे पास ही दिरहम कम हैं

वर्ना इस शहर में इस दर्जा गिरानी भी नहीं

पुस्तकें 5

 

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Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI