Khar Dehlavi's Photo'

ख़ार देहलवी

1916 - 2002 | दिल्ली, भारत

उर्दू की साझी संस्कृति और कल्चर के प्रतिनिधि शायर, पंडित आनंद मोहन ज्योतषी, गुलज़ार देहलवी के भाई

उर्दू की साझी संस्कृति और कल्चर के प्रतिनिधि शायर, पंडित आनंद मोहन ज्योतषी, गुलज़ार देहलवी के भाई

'ख़ार' उल्फ़त की बात जाने दो

ज़िंदगी किस को साज़गार आई

मोहब्बत ज़ुल्फ़ का आसेब जादू है निगाहों का

मोहब्बत फ़ित्ना-ए-महशर बला-ए-ना-गहानी है

मैं ने माना कि अदू भी तिरा शैदाई है

फ़र्क़ होता है फ़िदा होने में मर जाने में

उट्ठे बैठ कर कभी कू-ए-हबीब से

उस दर पे क्या गए कि उसी दर के हो गए

सच तो ये है कि दुआ ने दवा ने रक्खा

हम को ज़िंदा तिरे दामन की हवा ने रक्खा

ये नगरी हुस्न वालों की अजब नगरी है हमदम

कि इस नगरी में आहों की भी तासीरें बदलती हैं

चुपके से सह रहा हूँ सितम तेरे बेवफ़ा

मेरी ख़ता तो जब हो कि चूँ कर रहा हूँ मैं

बरहमी हुस्न को कुछ और जिला देती है

वो जमाली तेरा चेहरा वो जलाली आँखें

चश्म-ए-गिर्यां की आबयारी से

दिल के दाग़ों पे फिर बहार आई