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मज़हर इमाम

1928 - 2012 | दिल्ली, भारत

प्रमुखतम आधुकि शायरों में विख्यात/दूर दर्शन से संबंध

प्रमुखतम आधुकि शायरों में विख्यात/दूर दर्शन से संबंध

ग़ज़ल

ज़लज़ले सब दिल के अंदर हो गए

ज़िंदगी काविश-ए-बातिल है मिरा साथ न छोड़

टूटी हुई दीवार का साया तो नहीं हूँ

तारों से भरी राहगुज़र ले के गई है

दिलों के रंग अजब राब्ता है कितनी देर

निगाह ओ दिल के पास हो वो मेरा आश्ना रहे

मैं जानता हूँ वो नज़दीक ओ दूर मेरा था

शुक्रिया तेरा कि ग़म का हौसला रहने दिया

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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