Meer Taqi Meer's Photo'

मीर तक़ी मीर

1722-23 - 1810 | दिल्ली, भारत

उर्दू के पहले सबसे बड़े शायर जिन्हें ' ख़ुदा-ए-सुख़न, (शायरी का ख़ुदा) कहा जाता है.

उर्दू के पहले सबसे बड़े शायर जिन्हें ' ख़ुदा-ए-सुख़न, (शायरी का ख़ुदा) कहा जाता है.

रोते फिरते हैं सारी सारी रात

सारे आलम पर हूँ मैं छाया हुआ

कुछ करो फ़िक्र मुझ दीवाने की

बे-ख़ुदी ले गई कहाँ हम को

सिरहाने 'मीर' के कोई न बोलो

'मीर' अमदन भी कोई मरता है

हम हुए तुम हुए कि 'मीर' हुए

याद उस की इतनी ख़ूब नहीं 'मीर' बाज़ आ

याद उस की इतनी ख़ूब नहीं 'मीर' बाज़ आ

तुझी पर कुछ ऐ बुत नहीं मुनहसिर

तुझी पर कुछ ऐ बुत नहीं मुनहसिर

कोई तुम सा भी काश तुम को मिले