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मुस्तफ़ा ज़ैदी

1929 - 1970 | कराची, पाकिस्तान

तेग़ इलाहाबादी के नाम से भी विख्यात, पाकिस्तान में सी एस पी अफ़सर थे, रहस्यमय हालात में क़त्ल किए गए।

तेग़ इलाहाबादी के नाम से भी विख्यात, पाकिस्तान में सी एस पी अफ़सर थे, रहस्यमय हालात में क़त्ल किए गए।

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
पहला पत्थर

सबा हमारे रफ़ीक़ों से जा के ये कहना मुस्तफ़ा ज़ैदी

फ़नकार ख़ुद न थी मिरे फ़न की शरीक थी

मुस्तफ़ा ज़ैदी

मुसाफ़िर

मिरे वतन तिरी ख़िदमत में ले कर आया हूँ मुस्तफ़ा ज़ैदी

मिरी पत्थर आँखें

अब के मिट्टी की इबारत में लिखी जाएगी मुस्तफ़ा ज़ैदी

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Aakhri baar milo

सलमान अल्वी

किसी और ग़म में इतनी ख़लिश-ए-निहाँ नहीं है

अमानत अली ख़ान

किसी और ग़म में इतनी ख़लिश-ए-निहाँ नहीं है

ग़ुलाम अली

चले तो कट ही जाएगा सफ़र आहिस्ता आहिस्ता

मुसर्रत नज़ीर

दर्द-ए-दिल भी ग़म-ए-दौराँ के बराबर से उठा

आबिदा परवीन

शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

  • पहला पत्थर

    पहला पत्थर मुस्तफ़ा ज़ैदी

  • फ़नकार ख़ुद न थी मिरे फ़न की शरीक थी

    फ़नकार ख़ुद न थी मिरे फ़न की शरीक थी मुस्तफ़ा ज़ैदी

  • मुसाफ़िर

    मुसाफ़िर मुस्तफ़ा ज़ैदी

  • मिरी पत्थर आँखें

    मिरी पत्थर आँखें मुस्तफ़ा ज़ैदी

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  • किसी और ग़म में इतनी ख़लिश-ए-निहाँ नहीं है

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  • किसी और ग़म में इतनी ख़लिश-ए-निहाँ नहीं है

    किसी और ग़म में इतनी ख़लिश-ए-निहाँ नहीं है ग़ुलाम अली

  • चले तो कट ही जाएगा सफ़र आहिस्ता आहिस्ता

    चले तो कट ही जाएगा सफ़र आहिस्ता आहिस्ता मुसर्रत नज़ीर

  • दर्द-ए-दिल भी ग़म-ए-दौराँ के बराबर से उठा

    दर्द-ए-दिल भी ग़म-ए-दौराँ के बराबर से उठा आबिदा परवीन