नामी नादरी

ग़ज़ल 10

अशआर 3

ज़िंदगी बस मुस्कुरा के रह गई

क्यों हमें नाहक़ रिझा के रह गई

उरूज पर है अज़ीज़ो फ़साद का सूरज

जभी तो सूखती जाती हैं प्यार की झीलें

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हुस्न वालों की जसारत क्या कहें

शर्मसारी सर झुका के रह गई

 

पुस्तकें 3

 

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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