Nazeer Baaqri's Photo'

नज़ीर बाक़री

संभल, भारत

ग़ज़ल 10

शेर 12

खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए

सवाल ये है किताबों ने क्या दिया मुझ को

ज़ख़्म कितने तिरी चाहत से मिले हैं मुझ को

सोचता हूँ कि कहूँ तुझ से मगर जाने दे

इस लिए चल सका कोई भी ख़ंजर मुझ पर

मेरी शह-रग पे मिरी माँ की दुआ रक्खी थी

ई-पुस्तक 1

 

संबंधित शायर

  • अक़ील नोमानी अक़ील नोमानी समकालीन