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उबैदुर्रहमान आज़मी

आज़मगढ़, भारत

नज़्म 1

 

शेर 1

फ़लक से मुझ को शिकवा है ज़मीं से मुझ को शिकवा है

यक़ीं मानो तो ख़ुद अपने यक़ीं से मुझ को शिकवा है

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