Qamar Moradabadi's Photo'

क़मर मुरादाबादी

1910 - 1987

ग़ज़ल 8

शेर 11

अब मैं समझा तिरे रुख़्सार पे तिल का मतलब

दौलत-ए-हुस्न पे दरबान बिठा रक्खा है

The import of this spot upon your face I now detect

The treasure of your beauty does this sentinel protect

The import of this spot upon your face I now detect

The treasure of your beauty does this sentinel protect

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ग़म की तौहीन कर ग़म की शिकायत कर के

दिल रहे या रहे अज़मत-ए-ग़म रहने दे

belittle not these sorrows, of them do not complain

their glory be preserved, tho heart may not remain

belittle not these sorrows, of them do not complain

their glory be preserved, tho heart may not remain

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यूँ मिलने के सौ बहाने हैं

मिलने वाले कहाँ नहीं मिलते

ई-पुस्तक 2

Aaina-e-Sikandar

Hayat-e-Jigar

1979

माह-ए-तमाम

 

1962

 

ऑडियो 5

नज़र है जल्वा-ए-जानाँ है देखिए क्या हो

बे-नक़ाब उन की जफ़ाओं को किया है मैं ने

मंज़िलों के निशाँ नहीं मिलते

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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